वृद्धबालौ न हन्तव्यौ
न च स्त्री नैव पृष्ठतः।
तृणपूर्णमुखश्चैव
तवास्मिति च यो वदेत्।।
(महाभारत, शा. प. - ९८/४८)
अर्थात 👉 युध्द में वृद्ध, बालक और स्त्रियों का वध नही करना चाहिए, किसी भागते हुए की पीठ में आघात नही करना चाहिए, जो तिनका लिए हुए शरण मे आ जाये और कहने लगे "मैं आपका ही हूँ" उसका भी वध नही करना चाहिए।
🌄🌄 प्रभातवंदन 🌄🌄
एकं विषरसो हन्ति
शस्त्रेणैकश्च बध्यते।
सराष्ट्रं सप्रजं हन्ति
राजानं मन्त्रविप्लवः।।
(महाभारत, उद्योग पर्व - ३३/४५)
अर्थात् 👉 विष का रस एक को ही मारता है। शस्त्र से भी एक का ही वध होता है, किन्तु मंत्रणा का प्रकाशित होना राष्ट्र और प्रजा के साथ ही राजा का भी विनाश कर डालता है।
🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
सर्वदा सर्वकार्येषु नास्ति तेषाममङ्गलम्।
येषां हृदिस्थो भगवान् मङ्गलायतनो हरिः।।
जिसके हृदय में श्रीहरी हों, जो स्वयं मंगलायातन हैं, उनका वास हो, उनके सदैव, सर्व कार्य निर्विघ्न और मंगलकारी होते हैं।
🌄🌄 प्रभातवंदन 🌄🌄
🌼🌹🌼
धर्मादर्थः प्रभवति धर्मात् प्रभवते सुखम्।
धर्मेण लभते सर्वं धर्मसारमिदं जगत्।।
(वा. रामायण, अरण्य का. - ९/३०)
अर्थात् 👉 धर्म से अर्थ प्राप्त होता है, धर्म से सुख का उदय होता है, धर्म से ही मनुष्य सबकुछ प्राप्त कर लेता है, इस संसार में धर्म ही सार है। अतः शास्त्रोचित धर्म का पालन अवश्य करें।
🌄🌄 वंदन 🌄🌄
जय विघ्नकृतामाद्या भक्तनिर्विघ्नकारक।
अविघ्न विघ्नशमन महाविध्नैकविघ्नकृत्॥
भावार्थ:👉 हे भक्तों के विघ्नकर्ताओं का कारण, विघ्नरहित, विघ्नों का नाश करने वाला, महाविघ्नों का मुख्य विघ्न! आपकी जय हो।
🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
क्रोधमूलो मनस्तापः
क्रोधः संसारबन्धनम्।
धर्मक्षयकरः क्रोधः
तस्मात्क्रोधं परित्यज॥
भावार्थ 👉 क्रोध मन के दुःख का प्राथमिक कारण है, क्रोध संसार बंधन का कारण है,क्रोध धर्म का नाश करने वाला है,इसलिए क्रोध को त्याग दें।
🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
आयुषः क्षण एकोऽपि
सर्वरत्नैर्न लभ्यते।
नीयते तद्वृथा येन
प्रमाद: सुमहानहो।।
(योगवासिष्ठ - ६/१७५/७८)
अर्थात 👉 आयु का एक-एक क्षण भी संसार के सभी रत्नों से नही पाया जा सकता है, उस आयु को यदि कोई व्यर्थ में खोता है तो अहो! यह तो बड़ा भारी प्रमाद है।
🌄🌄 प्रभातवन्दन 🌄🌄
देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या
निश्शेषदेवगणशक्ति समूहमूत्र्या।
तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां
भक्त्या नता: स्म विदधातु शुभानि सा न:॥
अर्थ :- सम्पूर्ण देवताओं की शक्ति का समुदाय ही जिनका स्वरूप है तथा जिन देवी ने अपनी शक्ति से सम्पूर्ण जगत् को व्याप्त कर रखा है, समस्त देवताओं और महर्षियों की पूजनीया उन जगदम्बा को हम भक्ति पूर्वक नमस्कार करते हैं। वे हमलोगों का कल्याण करें।
🌄🌄 प्रभातवंदन 🌄🌄
करोतु सा न: शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः।
अर्थातः👉 वह कल्याण की साधनभूता ईश्वरी हमारा कल्याण और मङ्गल करे तथा सारी आपत्तियों का नाश कर डाले।
🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
*नारुन्तुदः स्यान्न नृशंसवादी न हीनतः परमभ्याददीत ।*_
_*ययास्य वाचा पर उद्विजेत न तां वदेदुषतीं पापलोक्याम् ॥*_
_*अर्थात् :*_- दूसरे के मर्म को चोट न पहुंचाए, चुभने वाली बातें न बोले, घटिया तरीके से दूसरे को वश में न करे, दूसरे को उद्विग्न करने एवं ताप पहुंचाने वाली, पापी जनों के आचरण वाली बोली न बोले ।
_*🙏 प्रातः वन्दनम् 🙏*_
_*आपका दिन शुभ और मंगलमयपूर्ण हो ऐसी ईश्वर से मेरी प्रार्थना है।*_
अपकारदशायाम्
अप्युपकुर्वन्ति साधवः।
छिन्दन्तमपि वृक्षः
स्वच्छायया किं न रक्षति।।
(सभारंजशतक - नीलकण्ठ दीक्षित)
अर्थात् - अपकार किए जाने पर भी सज्जन उपकार करते हैं, क्या वृक्ष अपनी छाया से वृक्ष को काटने वाले की भी रक्षा नहीं करता है?
🌄🌄 वंदन
सनत्कुमारः सनकः सनन्दनः
सनातनोऽप्यासुरिपिङगलौ च।
सप्त स्वराः सप्त रसातलानि
कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।
अर्थ👉 (ब्रह्मा के मानसपुत्र बाल ऋषि) सनतकुमार, सनक, सनन्दन और सनातन तथा (सांख्य-दर्शन के प्रर्वतक कपिल मुनि के शिष्य) आसुरि एवं छन्दों का ज्ञान कराने वाले मुनि पिंगल मेरे इस प्रभात को मंगलमय करें। साथ ही (नाद-ब्रह्म के विवर्तरूप षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत और निषाद) ये सातों स्वर और (हमारी पृथ्वी से नीचे स्थित) सातों रसातल (अतल, वितल, सुतल, रसातल, तलातल, महातल, और पाताल) मेरे लिए सुप्रभात करें।
🌄🌄 वंदन 🌄
म🔱॥ ॐ श्री आदित्याय नमः ॥🔱
🔥श्री दिवाकर वंदना 🔥
🔥प्रातः स्मरामि खलु तत्सवितुर्वरेण्यं रूपं हि मण्डलमृचोऽथ तनुर्यजूंषि सामानि यस्य किरणाः प्रभवादिहेतुं ब्रह्माहरात्मकमलक्ष्यमचिन्त्यरूपम्🔥
🔥भावार्थ : सूर्य का वह प्रशस्त रुप जिसका मण्डल ऋग्वेद, कलेवर यजुर्वेद तथा किरणें सामवेद हैं जो सृष्टि आदि के कारण हैं, ब्रह्मा और शिव के स्वरूप हैं तथा जिनका रुप अचिन्त्य और अलक्ष्य है, प्रातःकाल मैं उनका स्मरण करता हूँ🔥
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कैलासमन्दरमहेन्द्रनिकेतनाय लोकत्रयार्तिहरणाय नमः शिवाय ॥
शिवाष्टकम्।।२।।
जो कैलास, मन्दर और महेन्द्र पर्वतों में निवास करते हैं, और जो तीनों लोकों के दुख को दूर करते हैं, उस शिव को नमस्कार है।
🌄🌄 वंदन 🌄🌄
🙏 *जय बजरंगबली* 🙏
*मारुति नंदन , केसरी नंदन , भव भय भंजन नित्य स्मरणीय श्री पवनपुत्र हनुमान की अनूठी अनुकंपा से आप श्री शंकर सुवन महावीर बाबा के चरण कमलों का अनवरत आराधन वंदन करते रहें , इसी अनुपम कामना के साथ अनुरागित हृदय से अलमस्त भोर का मदमस्त सुप्रभात .*
*आज मंगलमूर्ति अंजनी सुत के प्राकट्य उत्सव एवं आनंदमयी हनुमान जयंती के पावन पर्व पर ढेर सारी शुभकामनाएं . आप श्री को पवनपुत्र बजरंगबली असीम बल बुद्धि एवं विद्या प्रदान करें , ऐसी शुभेक्षा के साथ पुनः हार्दिक बधाई .*
*जय हनुमान .*
*जय जय हनुमान .*
🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏
स्वयं ब्रह्मा स्वयं विष्णुः साक्षाद्देवो महेश्वरः ।
सूर्यमण्डलगः श्रीदः पातु कालत्रयेऽपि माम् ॥
हिंदी अनुवाद :- जो स्वयं ब्रह्मा, स्वयं विष्णु और स्वयं साक्षात महेश्वर देव हैं, वे सूर्यमण्डल तक पहुंचने वाले लक्ष्मीदाता हनुमान तीनों कालों में मेरी रक्षा करें।
🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
🌹🌷श्री हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक बधाई 🌷🌹
बलं विद्या च विप्राणां
राज्ञां सैन्यं बलं तथा।
बलं वित्तं च वैश्यानां
शूद्राणां च कनिष्ठिका।।
(चाणक्य नीति - २/१६)
अर्थात् 👉 ब्राह्मणों का बल विद्या है, राजा का बल सेना है, वैश्यों का बल धन है और शूद्रों का बल सेवा है।
🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
यदा धर्मश्च भार्या च
परस्परवशानुगौ।
तदा धर्मार्थकामानां
त्रयाणामपि सङ्गमः॥
अर्थात् 👉 यदि धर्म और स्त्री परस्पर वश में हों (सन्न्यस्त भाव छोड़कर) तो धर्म, अर्थ और काम इन तीनों वस्तुओं का एकत्र समागम होता है।
(महाभारत, वनपर्व - ३१३/१०१-१०२)
🌄🌄 वन्दन 🌄🌄
*कर्मेन्द्रियाणि संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन् ।*_
_*इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचारः स उच्यते ॥*_
_(श्रीमद्भगवद्गीता -३.६)_
_*भावार्थ :*_- _जो मूढ़ बुद्धि मनुष्य समस्त इन्द्रियों को हठपूर्वक ऊपर से रोककर मन से उन इन्द्रियों के विषयों का चिन्तन करता रहता है, वह मिथ्याचारी अर्थात दम्भी कहा जाता है ।_
_*🙏 वन्दनम् 🙏*_
_*
विद्या शस्त्रस्य शास्त्रस्य द्वे विद्ये प्रतिपत्तये ।
आद्या हास्याय वृद्धत्वे द्वितीयाद्रियते सदा॥
"शस्त्र -विद्या एवं शास्त्र-विद्या अर्थात ज्ञानार्जन, दोनों ही मनुष्य को सम्मान से परिपूर्ण करते हैं ।
परन्तु वृद्धावस्था प्राप्त होने पर जब शस्त्र विद्या का प्रदर्शन करने की उसकी शारीरिक क्षमता समाप्तप्राय हो जाती है तब शस्त्र-विद्या उसे उपहास का पात्र बना देती है।
लेकिन शास्त्र- ज्ञान सदा ही उसे आदर का पात्र बनाये रखता है।"
"शास्त्र सर्वदा व्यक्ति को सम्मानित कराता है"
ज्ञान ही सर्वश्रेष्ठ है
🚩 जय श्री राम 🚩
༺꧁आग्नेयास्त्र-आग्नेयनाथ꧂༻
कुलीनैः सह सम्पर्क पण्डितै: सह मित्रताम्।
ज्ञातिभिश्च समं मेल कुर्वाणो न विनश्यति॥
अर्थात् 👉 कुलीनों के साथ संपर्क, पंडितो के साथ मैत्री, (और) ज्ञातिजनों के साथ मेल रखने वाला इन्सान कभी नष्ट नही होता।
🌄🌄 वंदन 🌄🌄
ॐ नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च
मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च ।।
अर्थात.....
-यजुर्वेद
भावार्थ👉 जो सर्व कल्याणकारी है ,उसे प्रणाम ; जो सभी को सर्वोत्तम सुख देनेवाला है ,उसको प्रणाम ;जो सभी का मंगल करने वाला है ,उसको प्रणाम जो सर्व का सत्कार करने वाला है उसको प्रणाम।
🌄🌄 प्रभातवंदन 🌄🌄
द्वावेव न विराजेते
विपरीतेन कर्मणा।
गृहस्थश्च निरारम्भः
कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।।
(महाभारत, उद्योग पर्व - ३३/५७)
अर्थात् 👉 अकर्मण्य गृहस्थ और प्रपंची सन्न्यासी ये दोनों अपने विपरीत कर्म के कारण शोभा नहीं पाते। अतः गृहस्थ को अकर्मण्य और सन्न्यासी को प्रपंची कदापि नहीं होना चाहिए।
🌄🌄 वंदन 🌄🌄
मनोरथैकसाराणाम्
एवमेव गतं वयः।
अद्यापि न कृतं किञ्चित्
सत्तां संस्मरणोचितम्।।
(वल्लभदेव - ३३९३)
अर्थात् 👉 तरह-तरह की अभिलाषाएं करते-करते ही सारी आयु बीत गई और हाय - अबतक वह कुछ नहीं कर सका जो सत्पुरुषों के द्वारा स्मरण करने योग्य शेष रहता।
🌄🌄 वंदन 🌄🌄
गुरौ न प्राप्यते यत्तन्नान्यत्रापि हि लभ्यते।
गुरुप्रसादात सर्वं तु प्राप्नोत्येव न संशयः।।
भावार्थ:👉 गुरु के द्वारा जो प्राप्त नहीं होता, वह अन्यत्र भी नहीं मिलता। गुरु कृपा से निस्संदेह (मनुष्य) सभी कुछ प्राप्त कर ही लेता है।
🌄🌄 प्रभातवंदन 🌄🌄
वेदानुद्धरते जगन्ति वहते
भूगोलमुद्विभ्रते,
दैत्यं दारयते बलिम् छलयते
क्षत्रक्षयं कुर्वते।
पौलस्त्यं जयते हलं कलयते
कारुण्यमातन्वते,
मलेच्छान् मूर्च्छयते दशाकृतिकृते
कृष्णाय तुभ्यं नमः।।
(गीतगोविन्द - १/१६)
अर्थात - हे दशावतारधारी कृष्ण! आप मत्स्यरूप में वेदों का उद्धार करते हैं, कूर्म रूप में जगत को धारण करते हैं, नृसिंह रूप में दैत्य को नष्ट करते हैं, वामन रूप में बलि को छलते हैं, परशुराम रूप में क्षत्रीय-बल नष्ट करते हैं, रामचन्द्र रूप में रावण को जीतते हैं, बलराम रूप में हल को धारण करते हैं, बुद्ध रूप में करुणा को वितरित करते हैं और कलि रूप में म्लेच्छों को नष्ट करते हैं, आपको नमस्कार-प्रणाम निवेदित करता हूँ।
🌄🌄 प्रभातवंदन 🌄🌄
🚩🙏जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु जी के छठे अवतार, महापराक्रमी योद्धा, सत्य के रक्षक, ज्ञान,तप,समता व न्याय के अप्रतिम प्रतीक, शस्त्र और शास्त्र के ज्ञाता भगवान श्री परशुरामजी
तृष्णा हि सर्वपापिष्ठा
नित्योद्वेगकरी स्मृता।
अधर्मबहुला चैव
घोरा पापानुबन्धिनी।।
(महाभारत, वन पर्व - २/३५)
अर्थात् - तृष्णा सबसे बढ़कर पापिष्ठ तथा नित्य उद्वेग करनेवाली बताई गई है। उसके द्वारा प्रायः अधर्म ही होता है। वह अत्यन्त भयंकर पाप बन्धन में डालनेवाली है।
🌄🌄 वंदन
*मातृदिवसस्य शुभकामना*
*मातुः समयं ददातु, एतत् तस्याः कृते बृहत्तमं सुखम्*
*मातुः आदरं कुरुत, एषा एव तस्याः बृहत्तमः शान्तिः*
*मातुः समर्थनं कुरुत, तस्याः कृते एषः एव बृहत्तमः समर्थनः*
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
*चिन्ता कापि न कार्या*
*निवेदितात्मभि: कदापीति।*
*भगवानपि पुष्टिस्थो*
*न करिष्यति लौकिकीं गतिम्।।*
*(वल्लभाचार्य)*
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
*अर्थात् -👉 जिसने प्रभु को आत्म-निवेदन कर दिया है, उन्हें कभी किसी प्रकार की चिन्ता नहीं करनी चाहिए। पुष्टि (कृपा) करनेवाले प्रभु अंगीकृत जीव की लौकिक (सामान्य मनुष्य के समान) गति नहीं करते।*
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
*आपका दिन मंगलमय रहे*
*🙏🌹🚩सुप्रभातम्🚩🌹🙏*
परिग्रहो हि दुःखाय
यद्यत्प्रियतमं नृणाम्।
अनन्तसुखमाप्नोति
तद्विद्वान् यस्त्वकिञ्चन:।।
(श्रीमद्भागवत - ११/९/१)
अर्थात 👉 सबसे अधिक अच्छी लगनेवाली वस्तुओं का परिग्रह ही पुरुष के लिए दुःखदायी है, जो अकिंचन है, वह विद्वान् अनन्त सुख पाता है।
🌄🌄 प्रभातवंदन 🌄🌄
द्वेषः कस्य न दोषाय
प्रीतिः कस्य न भूतये।
दर्पः कस्य न पाताय
नोन्नत्यै कस्य नम्रता।।
(दर्पदलन/क्षेमेन्द्र - १/३२)
अर्थात् 👉 द्वेष करने से किसमे दोष नहीं आ जाता? प्रेम से किसकी उन्नति नहीं होती? अभिमान से किसका पतन नहीं हो सकता? और नम्रता से किसकी उन्नति नहीं हो सकती?
🌄🌄 प्रभातवंदन 🌄🌄
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं
सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्।"
भावार्थ 👉 उत्पत्ति, स्थिति (पालन) और संहार करने वाली, क्लेशों को हरने वाली तथा सम्पूर्ण कल्याणों को करने वाली श्री रामचन्द्रजी की प्रियतमा श्री सीताजी को मैं नमस्कार करता हूँ॥
🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
🌹
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गङ्गादितीर्थेषु वसन्ति मत्स्याः
देवालये पक्षिगणाश्च सन्ति।
भावोज्झितास्ते न फलं लभन्ते
तीर्थाच्च देवायतनाच्च मुख्यात्।।
भावं ततो हृत्कमले निधाय
तीर्थानि सेवेत समाहितात्मा।।
(नारदपुराणम्)
अर्थात् 👉 गंगा आदि तीर्थों में मछलियां निवास करती हैं, देव-मन्दिरों में पक्षिगण निवास करते हैं, किन्तु उनके चित्त भक्ति-भाव से रहित होने के कारण उन्हें तीर्थसेवन और देवमन्दिर में निवास करने से कोई फल नहीं मिलता। अतः हृदय-कमल में भाव का संग्रह करके एकाग्र-चित्त होकर तीर्थसेवन करना चाहिए।
🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
चिन्तया जायते दुःखं नान्यथेहेति निश्चयी।*_
_*तया हीनः सुखी शान्तः सर्वत्र गलितस्पृहः॥*_
_*भावार्थ :*_- _चिंता से ही दुःख उत्पन्न होते हैं किसी अन्य कारण से नहीं, ऐसा निश्चित रूप से जानने वाला, चिंता से रहित होकर सुखी, शांत और सभी इच्छाओं से मुक्त हो जाता है ।_
_*🙏 प्रातः वन्दनम् 🙏*_
_*आपका दिन शुभ और मंगलमयपूर्ण हो ऐसी ईश्वर से मेरी प्रार्थना है।*_
उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥
अर्थ:👉🏻 हे भगवान विष्णुं, आप बहुत तेजवान और बहादुर हैं। आप सर्वशक्तिमान हैं। आपने मृत्यु को पराजित करने वालों में से एक हैं और मैं आपको नमन करता हूँ..!
🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
🌹🌹 !🌹🌹
विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया
विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत्।
तदेतत्क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति।।
देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्
अर्थ 👉 सबका उद्धार करने वाली हे करुणामयी माता ! तुम्हारी पूजा की विधि न जान्ने के कारण, धन के आभाव में, आलस्य से और उन विधियों को अच्छी तरह न कर सकने के कारण, तुम्हारे चरणों की सेवा करने में जो भूल हुई हो उसे क्षमा करो, क्योंकि पूत तो कपूत हो जाता है पर माता कुमाता नहीं होती।
🌄🌄 प्रभातवन्दन 🌄🌄
🌹🌼देवी छिन्नमस्तिका जन्मोत्सव की हार्दिक मंगल कामनाये🌼🌹
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जन:।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥
श्रीमद्भगवद गीता (तृतीय अध्याय, श्लोक २१)
अर्थ👉 श्रेष्ठ पुरुष जो-जो आचरण यानी जो-जो काम करते हैं, दूसरे मनुष्य (आम इंसान) भी वैसा ही आचरण, वैसा ही काम करते हैं। वह (श्रेष्ठ पुरुष) जो प्रमाण या उदाहरण प्रस्तुत करता है, समस्त मानव-समुदाय उसी का अनुसरण करने लग जाते हैं।
🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
🌹🌷 बुद्ध एवं कूर्म अवतार जन्मोत्सव की हार्दिक मंगल कामनाएं 🌷🌹
श्रद्दधानः शुभां विद्यामाददीतावरादपि।
अन्त्यादपि परं धर्मं स्त्रीरत्नं दुष्कुलादपि।।
(मनुस्मृति - २/२३८)
अर्थात् 👉 श्रद्धायुक्त होकर अपनी अपेक्षा नीच व्यक्ति से भी श्रेष्ठ विद्या को ग्रहण करना चाहिए। चांडाल से भी परम धर्म को प्राप्त करना चाहिए तथा अपने से नीच कुल से भी स्त्री-रत्न को ग्रहण करना चाहिए।
🌄🌄 वंदन 🌄🌄
🌹🌷महर्षि नारद जन्मोत्सव की शुभकामनाये🌷🌹
गुणिनामपि निजरूपप्रतिपत्तिः
परत एव सम्भवति।
स्वमहिमदर्शनमक्ष्णोर्मुकुरतले
जायते यस्मात्।।
(वल्लभदेव -३१२)
अर्थात् 👉 गुणी व्यक्तियों को भी अपने स्वरूप का परिचय दूसरों के द्वारा ही होता है क्योंकि आंखों को भी अपनी महिमा का दर्शन-दर्पण में ही होता है।
🌄🌄 वंदन 🌄🌄
क्षेत्रे पापस्य करणं
दृढं भवति भूसुराः।
पुण्यक्षेत्रे निवासे हि
पापमण्वपि नाचरेत्।।
(विद्येश्वर संहिता - १२/७)
अर्थात् 👉 हे श्रेष्ठ जनों ! पुण्य क्षेत्र में पाप किया जाय तो वह और भी दृढ़ हो जाता है, अतः पुण्य क्षेत्र में निवास करते समय थोड़ा सा भी पाप कर्म नहीं करना चाहिए।
🌄🌄 वंदन 🌄🌄
धनधान्य प्रयोगेषु विद्या सङ्ग्रहेषु च।
आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्॥
भावार्थ👉 धन और अनाज के लेन - देन, विद्या प्राप्त करते समय, भोजन तथा आपसी व्यवहार में लज़्ज़ा न करनेवाला सुखी रहता है ।
जय श्री कृष्ण।
🌄🌄 वंदन 🌄🌄
ऋणानि त्रीण्यपाकृत्य
मनो मोक्षे निवेशयेत।
अनपाकृत्य मोक्षं तु
सेवमानां व्रजत्यधः।।
(मनुस्मृति - ६/३५)
अर्थात् - तीनों ऋणों (देव ऋण, पितृ ऋण, ऋषि ऋण) को चुकाकर मन को मोक्ष में लगाना चाहिए। बिना ऋणों को चुकाए मोक्ष के लिए प्रयत्न करने वाला पापाचारी होता है।
🌄🌄 वंदन 🌄🌄
हिताहितं सुखं दुःखम्
आयुस्तस्य हिताहितम्।
मानं च तच्च यत्रोक्तम्
आयुर्वेदः स उच्यते।।
(चरक संहिता)
अर्थात 👉 जिस शास्त्र में हितमय, अहितमय, सुखमय, दुःखमय आयु तथा आयु के लिए हितकर और अहितकर द्रव्य, गुण, कर्म आदि के प्रमाण एवं लक्षण का वर्णन होता है, उसे आयुर्वेद कहते हैं।
🌄🌄 वन्दन 🌄🌄
अजोऽपि सन्नव्ययात्मा
भूतानामीश्वरोऽपि सन्।
प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय
सम्भवाम्यात्ममायया ॥
(श्रीमद्भगवद्गीता-४.६)
अर्थात् 👉 श्री भगवान बोले- मैं अजन्मा और अविनाशीस्वरूप होते हुए भी तथा समस्त प्राणियों का ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृति को अधीन करके अपनी योगमाया से प्रकट होता हूँ
🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
अकृत्यं नैव कृत्यं स्यात्
प्राणत्यागेsपि समुपस्थिते।
न च कृत्यं परित्याज्यम्
एष धर्मः सनातनः।।
(पञ्चतंत्र - ४/४२)
अर्थात् 👉 प्राण-संकट उपस्थित हो जाने पर भी नहीं करने योग्य कार्य को नहीं करना चाहिए और करणीय कर्म का त्याग नहीं करना चाहिए, यह सनातन (पारम्परिक) धर्म है।
🌄🌄 वंदन 🌄🌄
काम एष क्रोध एष
रजोगुणसमुद्भवः।
महाशनो महापाप्मा
विद्ध्येनमिह वैरिणम्॥
(श्रीमद्भगवद्गीता-३.३७)
अर्थात् 👉 श्री भगवान बोले- रजोगुण से उत्पन्न हुआ यह काम ही क्रोध है। यह बहुत खाने वाला अर्थात भोगों से कभी न थकने वाला और बड़ा पापी है। इसको ही तू इस विषय में वैरी जान।
🌄🌄 वंदन 🌄🌄
चित्तमन्तर्गतं दुष्टं
तीर्थस्नानान्न शुद्ध्यति।
शतशोऽपि जलैर्धौतं
सुराभाण्डमिवाशुचिः।।
(स्कन्द महापुराण, काशी खण्ड - ६/३८
व जाबालदर्शनोपनिषद् - ४/५४)
अर्थात् 👉 चित्त के भीतर यदि दोष भरा है तो वह तीर्थ-स्नान से शुद्ध नहीं होता। जैसे मदिरा से भरे हुए घड़े को ऊपर से जल द्वारा सैकड़ों बार धोया जाय तो वह पवित्र नहीं होता, उसी प्रकार दूषित अन्तःकरण वाला मनुष्य तीर्थ-स्नान से शुद्ध नहीं होता।
🌄🌄 वंदन 🌄🌄
कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं
बोद्धव्यं च विकर्मणः।
अकर्मणश्च बोद्धव्यं
गहना कर्मणो गतिः ॥
(श्रीमद्भगवद्गीता-४.१७)
अर्थात् 👉 श्री भगवान बोले- कर्म का स्वरूप भी जानना चाहिए और अकर्मण का स्वरूप भी जानना चाहिए तथा विकर्म का स्वरूप भी जानना चाहिए क्योंकि कर्म की गति गहन है।
🌄🌄 वंदन 🌄🌄
भागीरथि सुखदायिनी मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यातः ।
नाहं जाने तव महिमानं
पाहि कृपामयी मामज्ञानम् ॥
अर्थ:👉 (देवी गंगा को नमस्कार) हे माता भागीरथी , आप सभी को आनंद देती हैं , और आपके जल की महिमा का गुणगान शास्त्रों में किया गया है,मैं आपकी महिमा को पूरी तरह से नहीं जानता , लेकिन मेरे अज्ञान के बावजूद, कृपया मेरी रक्षा करें।
🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
🌼🌼
ॐ भूर् भुवः स्वः।
तत् सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
भावार्थ👉 उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अन्तरात्मा में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।
🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
🌼🌹🌹🌼
यानधर्मफलं हन्ति
तदर्धं छत्रपादुके।
वाणिज्यं त्रींस्तथा भागान्
सर्वं हन्ति प्रतिग्रहः।।
अर्थात् 👉 सवारी से तीर्थ करना तीर्थ यात्रा का आधा फल नष्ट कर देता है, उसका आधा फल छाता तथा जूता हर लेते हैं, व्यापार उसका तीन-चौथाई भाग नष्ट कर देता है।
🌄🌄 वंदन 🌄🌄