Sunday, July 14, 2024

सुविचार ज्ञानामृत

 *🛕 सुविचार ज्ञानामृत 🛕*


*नरस्याभरणं   रूपं*

      *रूपस्याभरणं गुण:।*

*गुणस्याभरणं ज्ञानं*

     *ज्ञानस्याभरणं क्षमा॥*

भावार्थ

          _मनुष्य का आभूषण उसका रूप होता है, रूप का आभूषण गुण होता है, गुण का आभूषण ज्ञान होता है और ज्ञान का आभूषण क्षमा होता है।अर्थात् रूपवान् होना भी तभी सार्थक है जब सच्चे गुण, सच्चा ज्ञान और क्षमा मनुष्य के भीतर हो।_


मानं हित्वा प्रियो भवति

क्रोधं हित्वा न शोचति।

कामं हित्वार्थवान् भवति

लोभं हित्वा सुखी भवेत्।।


(महाभारत, वन पर्व - ३१३/७८)


अर्थात् 👉 मान को त्याग देने पर मनुष्य प्रिय हो जाता है, क्रोध को त्याग देने पर शोक नहीं करता, काम को त्याग कर अर्थवान होता है, लोभ को त्याग कर सुखी होता है।


🌄🌄  वंदन 🌄🌄


चित्तोद्वेगं विधायापि

हरिर्यद्यत् करिष्यति।

तथैव तस्य लीलेति

मत्वा चिन्तां द्रुतं त्यजेत॥


अर्थात 👉 चित्तोद्वेग में संयम रख कर और ऐसा मान कर कि श्रीहरि जो भी करेंगे वह उनकी लीला मात्र है सब शीघ्र ठीक हो जाएगा, चिंता को शीघ्र त्याग दें।


🌄🌄 वंदन 🌄🌄

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सुविचार ज्ञानामृत

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