एक ही अक्षर से बना श्लोक पढ़ा है कभी..??
यदि नहीं, तो पढ़े जरुर -
"कः कौ के केककेकाकः काककाकाककः ककः ।
काकः काकः ककः काकः कुकाकः काककः कुकः ॥"
अर्थात- परब्रह्म #कः श्री राम पृथ्वी #कौ) और साकेतलोक #के में [दोनों स्थानों पर] सुशोभित हो रहे हैं। उनसे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में आनन्द निःसृत होता है। वह मयूर की केकी #केककेकाकः) एवं काक (काकभुशुण्डि) की काँव-काँव #काककाकाककः) में आनन्द और हर्ष की अनुभूति करते हैं। उनसे समस्त लोकों #ककः) के लिए सुख का प्रादुर्भाव होता है। उनके लिए [वनवास के] दुःख भी सुख #काकः हैं। उनका काक #kकाकः [काकभुशुण्डि] प्रशंसनीय है। उनसे ब्रह्मा #ककः को भी परमानन्द की प्राप्ति होती है। वह अपने भक्तों को पुकारते #काकः हैं। उनसे कूका अथवा सीता #कुकाकः को भी आमोद प्राप्त होता है। वह अपने काक [काकभुशुण्डि] को पुकारते #काककः) हैं और उनसे सांसारिक फलों एवं मुक्ति का आनन्द #कुक: प्रकट होता है।
|| हमारी संस्कृति जयतु संस्कृतं ||
No comments:
Post a Comment