Saturday, July 6, 2024

*१० लकार का अनमोल ज्ञान

 *१० लकार का अनमोल ज्ञान :-* 🙏


🔸 संस्कृत में काल दश भागों में विभाजित है जिनको दश लकार कहा जाता है :--


०१ ) लट् ---- ल् + अ + ट्

०२ ) लिट् ---- ल् + इ + ट् 

०३ ) लुट् ---- ल् + उ + ट् 

०४ ) लृट् ---- ल् + ऋ + ट्

०५ ) लेट् ---- ल् + ए + ट्

०६ ) लोट् ---- ल् + ओ + ट्

०७ ) लङ् ---- ल् + अ + ङ्

०८ ) लिङ्---- ल् + इ + ङ् 

०९ ) लुङ्---- ल् + उ + ङ् 

१० ) लृङ्---- ल् + ऋ + ङ्


🔸 *इनको स्मरण करने की विधी ये है कि :-*

ल् में ( अ इ उ ऋ ए ओ ) क्रम से जोड़ दो । और पहले कर्मों में ( ट् ) जोड़ते जाओ ।


फिर बाद में ( ङ् ) जोड़ते जाओ जब तक कि दश लकार पूरे न हो जाएँ ।


🔸 *इन लकारों के काल ये हैं :-*


(१) *लट् लकार* = वर्तमान काल । 

जैसे :- राम खेलता है।

       रामः क्रीडति ।


(२) *लिट्* = अनद्यतन परोक्ष भूतकाल । जो अपने साथ न घटित होकर किसी इतिहास का विषय हो । 

जैसे :-

 राम ने रावण को मारा था ।

रामः रावणं जघान,

जघान जघ्नतुः जघ्नुः 

जघनिथ जघ्नथुः जघ्न 

जघान जघ्निव जघ्निम 


(३) *लुट् लकार* = अनद्यतन भविष्यत काल । जो आज का दिन छोड़ कर आगे होनो वाला हो । 

जैसे :-

 राम परसों विद्यालय नहीं जायेगा ।

रामः परश्वं विद्यालयं न गन्ता |

गन्ता गन्तारौ गन्तारः 

गन्तासि गन्तास्थः गन्तास्थ 

गन्तास्मि गन्तास्वः गन्तास्मः 


(४) *लृट् लकार* = सामान्य भविष्य काल । जो आने वाले किसी भी समय में होने वाला हो । 

जैसे :- 

राम यह कार्य करेगा । 

रामः इदम् कार्यम् करिष्यति।


(५) *लेट् लकार* = यह लकार केवल वेद में प्रयोग होता है ईश्वर के लिए क्योंकि वह किसी काल में बंधा नहीं है ।

(६) *लोट् लकार* = ये लकार आज्ञा, अनुमति लेना, प्रशंसा करना, प्रार्थना आदि में प्रयोग होता है । 

जैसे :- आप जाओ -भवान् आगच्छतु , वह खेले -सः क्रीडतु , तुम खाओ - त्वं खाद , क्या मैं बोलूँ -किम् अहं वदानि ?


(७) *लङ् लकार* = अनद्यतन भूत काल । आज का दिन छोड़ कर किसी अन्य दिन जो हुआ हो । 

जैसे :- 

आपने उस दिन भोजन पकाया था - भवान् तस्मिन् दिने भोजनं अपचत् ।


(८) *लिङ् लकार* = इसमें दो प्रकार के लकार होते हैं :--


*आशीर्लिङ्*= किसी को आशिर्वाद देना हो ।


जैसे :- 

आप जीओ - भवान् जीवेत्।

तुम सुखी रहो।त्वं सुखी भव । आदि 


*विधिलिङ्* = किसी को विधी बतानी हो ।

 जैसे :- 

आपको पढ़ना चाहिए - भवान् भठेत्।

मुझे जाना चाहिए - अहं गच्छेयम् ।

आदि ।


(९) *लुङ् लकार* = सामान्य भूत काल । जो कभी भी बीत चुका हो । 

जैसे :- 

*उसने खाना खाया - सः भोजनं अखादीत् ।*


(१०) *लृङ् लकार* = ऐसा भूत काल जिसका प्रभाव वर्तमान तक हो । जब किसी क्रिया की असिद्धी हो गई हो ।

 जैसे :- 

यदि वह पढ़ता तो विद्वान बनता । - 

यदि सः अपठिष्यत् तु विद्वान् अभविष्यत्।


इन्हीं लकारों में सभी धातुरूप चलते हैं ।

*🚩जयतु संस्कृतम् ।। जयतु भारतम् ।। जयतु आर्यावर्तम् ।।🚩*

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